स्पेशल ट्रेन से घर लौटे यात्रियों के चेहरे पर खुशी उनके मन को भाव बता रहे थे। लॉकडाउन के बाद से ही वह दुश्वारियों में जी रहे थे। रोजगार ठप होने और जेब खाली होने के कारण वह घर पहुंचने को परेशान थे। परदेश में कोई मददगार न होने से उनकी दिक्कतें लगातार बढ़ती जा रही थीं। कई यात्री ऐसे भी रहे, जिन्हें घर से पैसे मंगाने पड़े। हालांकि इन तमाम परेशानियों के बीच पंजाब सरकार की व्यवस्थाओं से यात्री संतुष्ट नजर आए।मुंगराबादशाहपुर की कंचन ने बताया कि लॉकडाउन के 45 दिनों ने शहर और गांव का फर्क समझा दिया। गांवों में तो लोग मदद से पीछे नहीं हटते, जबकि शहर में मतलब का रिश्ता रखते हैं। बसंत लाल ने कहा कि रोजगार बंद होने के बाद परेशानी बढ़ गई थी। घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। गौरा के रवींद्र, राजेश ने भी परदेश में बेरोजगारी के साथ जीवनयापन की दुश्वारियों को बताया। खुटहन के राकेश, सीमा का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान उन लोगों को कच्चा राशन उपलब्ध कराया गया था। सरकार मदद कर रही थी, लेकिन घर पहुंचना ज्यादा अच्छा लगा। गौरा निवासी रवींद्र, राजेश, खुटहन के राकेश, सीमा आदि यात्रियों ने भी पंजाब सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं को ठीक बताया। धनियामऊ के राम सिंह, सरपतहां लके सुनील, शाहगंज के महेंद्र कुमार का कहना था कि पटियाला स्टेशन पर पहुंचने के बाद उन्हें टिकट दिया गया, लेकिन कोई पैसा नहीं लिया गया। सरकार यह पहल न करती तो वह घर भी नहीं आ पाते। जेब खाली हो चुकी थी। अंबेडकरनगर के पंकज ने बताया कि वह पेंट का काम करते थे, जो इस वक्त बंद है। खाने-पीने की दिक्कतें बढ़ गई थीं। शाहगंज के मंगला प्रसाद, खेतासराय के भूपेंद्र राजभर ने बताया कि गांव में रोजगार मिलता तो मजदूरी के लिए पंजाब नहीं जाता। अब वहां भी काम बंद हो गया था तो रह कर क्या करते।
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