समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों के खातों में लाखों रुपए तो जमा हो गए, लेकिन वे इसका आहरण नहीं कर पा रहे। जिला सहकारी बैंक में नकदी की कमी रहना इसका कारण है। बैंक को जिले की पांच शाखाओं में करीब 3 करोड़ रुपए का भुगतान रोज करना होता है, लेकिन प्रबंधन को भारतीय स्टेट बैंक से इतनी नकदी नहीं मिल रही। हरदा की मुख्य शाखा में ही रोज 1 करोड़ की जरूरत रहती है, लेकिन यहां औसत 50 लाख रुपए मिलते हैं। उल्लेखनीय है कि जिले के किसानों के खाते में गेहूं खरीदी के एवज में अब तक 434.89 करोड़ रुपए जमा कराए गए हैं। राष्ट्रीयकृत बैंकों में जिन किसानों के खाते हैं उन्हें तो भुगतान समय पर मिल रहा है, लेकिन जिनके खाते सहकारी बैंक में हैं उन्हें नकदी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।किसानों ने किया घंटो इंतजार
सोमवार को मुख्य शाखा में सुबह से पहुंचे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुकरावद के किसान राजेंद्र ढोके, झल्लार के किसान नन्हेलाल पिता प्यारेलाल, गुठानिया के कपिल पिता मनोहरलाल, बरखेड़ी के किसान गोविंदराम आदि ने बताया कि उन्हें 1 लाख रुपए तक की जरूरत है। सुबह 25 हजार रुपए दिए जा रहे थे। 1 लाख रुपए के लिए दोपहर तक रुकने को कहा गया। दोपहर 2 बजे तक किसानों को भुगतान नहीं हुआ था। उनका कहना था कि अपने पैसे के लिए ही इतना इंतजार करना महंगा पड़ता है। दूर से आने में उन्हें परेशानी होती है। इस संबंध में बैंक के नोडल अधिकारी सतीश सिटोके ने बताया कि जिले में रोज करीब 3 करोड़ रुपए की जरूरत रहती है, लेकिन इतने मिलते नहीं। कलेक्टर को समस्या से अवगत कराया गया था। इससे व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। किसानों को मांग अनुसार नकदी दिया जा रहा है।
सोमवार को मुख्य शाखा में सुबह से पहुंचे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुकरावद के किसान राजेंद्र ढोके, झल्लार के किसान नन्हेलाल पिता प्यारेलाल, गुठानिया के कपिल पिता मनोहरलाल, बरखेड़ी के किसान गोविंदराम आदि ने बताया कि उन्हें 1 लाख रुपए तक की जरूरत है। सुबह 25 हजार रुपए दिए जा रहे थे। 1 लाख रुपए के लिए दोपहर तक रुकने को कहा गया। दोपहर 2 बजे तक किसानों को भुगतान नहीं हुआ था। उनका कहना था कि अपने पैसे के लिए ही इतना इंतजार करना महंगा पड़ता है। दूर से आने में उन्हें परेशानी होती है। इस संबंध में बैंक के नोडल अधिकारी सतीश सिटोके ने बताया कि जिले में रोज करीब 3 करोड़ रुपए की जरूरत रहती है, लेकिन इतने मिलते नहीं। कलेक्टर को समस्या से अवगत कराया गया था। इससे व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। किसानों को मांग अनुसार नकदी दिया जा रहा है।
234 किसानों से ही खरीदा गया चना
जिले के 13 केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर चना खरीदी शुरू की गई है। जिले में 9557 किसानों ने समर्थन मूल्य पर चना उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है। सोमवार तक इसमें से 234 किसानों से 217.2 मीट्रिक टन चना खरीदा जा चुका है। अब तक एक भी किसान को भुगतान नहीं हुआ है।
जिले के 13 केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर चना खरीदी शुरू की गई है। जिले में 9557 किसानों ने समर्थन मूल्य पर चना उपार्जन के लिए पंजीयन कराया है। सोमवार तक इसमें से 234 किसानों से 217.2 मीट्रिक टन चना खरीदा जा चुका है। अब तक एक भी किसान को भुगतान नहीं हुआ है।
ऋण खातों में जमा हुए 12 करोड़ रुपए
इधर, कांग्रेस शासनकाल में जिन किसानों का ऋण माफ नहीं हो सका था उनसे इसकी वसूली की जा रही है। दूसरे चरण में सहकारी बैंक के करीब 6 5 करोड़ रुपए का ऋण माफ होना था। इन कर्जदार किसानों द्वारा गेहूं बेचने पर बिल में से उनके खातों में ऋण राशि जमा की जा रही है। अब तक करीब 12 करोड़ रुपए समितियों को मिल चुका है।
इधर, कांग्रेस शासनकाल में जिन किसानों का ऋण माफ नहीं हो सका था उनसे इसकी वसूली की जा रही है। दूसरे चरण में सहकारी बैंक के करीब 6 5 करोड़ रुपए का ऋण माफ होना था। इन कर्जदार किसानों द्वारा गेहूं बेचने पर बिल में से उनके खातों में ऋण राशि जमा की जा रही है। अब तक करीब 12 करोड़ रुपए समितियों को मिल चुका है।
बैंक खुलने से पहले ही पहुंच रहे ग्राहक
उपज की राशि के साथ ही शासन द्वारा हितग्राहियों के खातों में जमा की जा रही राशि को निकालने ग्राहक समय से पहले ही बैंकों में पहुंच रहे हैं। बैंक खुलने तक यहां खासी भीड़ जमा हो जाती है। 34408 किसान बेच चुके गेहूं: जिले के 34 हजार 408 किसानों ने गेहूं बेचने का पंजीयन कराया है। खाद्य विभाग के अनुसार अब तक 33728 किसानों से 354738 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसमें से 299385 मीट्रिक टन का ही परिवहन हो सका है।
उपज की राशि के साथ ही शासन द्वारा हितग्राहियों के खातों में जमा की जा रही राशि को निकालने ग्राहक समय से पहले ही बैंकों में पहुंच रहे हैं। बैंक खुलने तक यहां खासी भीड़ जमा हो जाती है। 34408 किसान बेच चुके गेहूं: जिले के 34 हजार 408 किसानों ने गेहूं बेचने का पंजीयन कराया है। खाद्य विभाग के अनुसार अब तक 33728 किसानों से 354738 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। इसमें से 299385 मीट्रिक टन का ही परिवहन हो सका है।
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