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Thursday, 14 May 2020

भारतीय रेलवे ने दिए संकेत- आने वाले दिनों में चलाई जाएंगी और अधिक स्पेशल ट्रेनें, जानिए क्या है प्लान

Lockdown के दौरान विशेष राजधानी ट्रेनों को चलाने के दो दिन बाद अब इंडियन रेलवे ने संकेत दिए हैं कि वह आने वाले दिनों में जल्द ही मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों को शुरू कर सकती है. रेलवे बोर्ड ने बुधवार को एक आदेश जारी कर कहा है कि वर्तमान में चल रही ट्रेनों और भविष्य में शुरू होने वाली सेवाओं के लिए 22 मई से वेटिंग लिस्ट की व्यवस्था शुरू की गई है.
रेलवे ने इन ट्रेनों के लिए वेटिंग लिस्ट की सीमा भी तय की है. एसी 3 टियर के लिए 100 , एसी 2 टियर के लिए 50, स्लीपर क्लास के लिए 200, चेयर-कार्स के लिए 100 और फ़र्स्ट एसी एंड एग्ज़ेक्युटिव क्लास के लिए 20-20 होगी. कन्फर्म टिकट के लिए कतारों को काफी कम कर दिया गया है. 22 मई से शुरू होने वाली यात्राओं के लिए 15 मई से बुक किए गए टिकटों के लिए ये बदलाव लागू होंगे.
रेलवे ने कहा कि विशेष ट्रेनें, जिन्हें बाद में अधिसूचित किया जाएगा, उनकी प्रतीक्षा सूची 22 मई से होगी. आदेश में यह भी कहा गया है कि विशेष ट्रेनों में रद्द (आरएसी) के लिए कोई आरक्षण नहीं होगा. रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि रेलवे वर्तमान में सभी वातानुकूलित ट्रेनों के बजाय मिश्रित सेवाओं को चलाने की योजना बना रहा है.
रेलवे के ताजा आदेश से यह भी संकेत मिलता है कि वह छोटे शहरों में भी सेवा शुरू करेंगे. सभी यात्री, मेल और एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं को रद्द करने के लगभग 48 दिनों के बाद रेलवे ने मंगलवार से 15 जोड़ी स्पेशल राजधानी ट्रेनें शुरू की थी. रेलवे ने 1 मई से फंसे हुए प्रवासी कामगारों, छात्रों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को ले जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की भी शुरुआत की है.

Wednesday, 13 May 2020

Lockdown : कोटा में साथ-साथ चल रहा कोरोना का भय ट्रेन खुलने के साथ ही पीछे छूटता चला गया

आसपास पसरा हुआ था कोरोना, हर हमेशा बनी रहती थी संक्रमण की आशंका। भय और दहशत के बीच पूजा और माता-पिता से नियमित वीडियो कॉलिंग ही सहारा था। घर से हजारों किलोमीटर दूर राजस्थान के कोटा से घर लौटे छात्र-छात्राओं के चेहरे पर भय और दहशत स्पष्ट रूप से झलक रहा था। प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में बस से उतरने के पश्चात वहां इंतजार कर रहे स्वजन को देख कई बच्चों की आंखें डबडबा गईं तो कई अपने आप को रोक नहीं पाए और फफक पड़े। करोना संक्रमण के बीच लॉकडाउन के दौरान अपनी आपबीती सुनाते हुए अधिकांश बच्चे अपने-अपने मकान मालिक या हॉस्टल इंचार्ज की मानवता की सराहना अवश्य कर रहे थे।
मम्मी-पापा करते रहे बूस्टअप
प्रखंड के महुली की रहनेवाली दो बहनों ने अपने मकान मालिक द्वारा भरसक ख्याल रखने की बात कही। लेकिन, कोरोना का दहशत तथा लॉकडाउन के दौरान कभी-कभी भोजन तक में हुई परेशानी का जिक्र करते हुए कहीं, ट्रेन और प्लेन बंद होने के बाद समझ में नहीं आ रहा था, कैसे पहुंचेंगे घर। हालांकि, हर दिन मम्मी-पापा हमलोगों को बूस्ट अप करते रहते थे। बावजूद, शुरू में तो कई रात बगैर नींद के ही कट गई।
भूख और नींद दोनों उड़ गई
कोटा के महावीर नगर में रह रही बड़ी बहन मेडिकल तथा छोटी अभियंत्रण की तैयारी कर रही थी। वहीं मेडिकल की तैयारी कर रहा एरौत का एक छात्र ने भी हर हमेशा कोरोना की आशंका और दहशत बना रहना बताया। कहा, लॉकडाउन के बाद से ही भूख और नींद दोनों उड़ गई थी। पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा था। जब सरकार ने घर वापस लाने की घोषणा की तो खुशी का ठिकाना ना रहा। राजीव नगर में रह रहे एक छात्र ने भी अपने मकान मालिक द्वारा पूरा ख्याल रखने की बात कही।
बाहर का खाना देख लगता था संक्रमण का डर
कुन्हारी में रहकर एलन में ही मेडिकल की तैयारी कर रही भिरहा की एक छात्रा ने डबडबाई आंखों से आपबीती सुनाई। बोली जब तक हॉस्टल के मेस में खाना बनता रहा, तब तक डर और आशंका के बीच भोजन ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन कुछ दिनों के बाद जब खाना बाहर से आने लगा तो कोरोना संक्रमण के कारण खाना खाने में भी डर लगता था। इसके अलावा शहर एवं विभिन्न गांवों के अन्य छात्र-छात्राओं ने भी दहशत में कटे लॉकडाउन के समय को बताते हुए अपने घर पहुंचते ही राहत की सांस ले रहे थे।
घर पहुंचने की आशा पूरी
वहीं, सभी ने कोटा से रोसड़ा तक की अपनी सफर को भी खुशनुमा बताया। कहा घर पहुंचने की आश पूरी हो गई। कोटा स्टेशन पर रात्रि के नौ बजे ट्रेन खुलने से पूर्व एलेन इंस्टीट््यूट द्वारा सभी बच्चों को नाश्ता का पैकेट और पर्याप्त पानी का बोतल दिया गया। तत्पश्चात स्क्रीनिंग कर बैठाया गया। रास्ते में दूसरे दिन भोजन में चावल फ्राई देने की बात कही। कई बच्चों ने बोगी में ही घोषणा पत्र भरवाने की भी जानकारी दी।

Tuesday, 12 May 2020

Lockdown पर PM मोदी के साथ 6 घंटे चली मीटिंग में किस सीएम ने क्या सलाह दी



Lockdown : 17 मई को समाप्त हो रहे लॉकडाउन के बीच आगे की रणनीति के लिए पीएम मोदी ने सोमवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक की. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि 17 मई के बाद भी किसी न किसी रूप में जारी रहेगा, लेकिन राज्य सरकारों को अपने राज्यों में ग्रीन जोन में आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए अपनी योजनाओं को 15 से 17 मई के बीच विचार के लिए केंद्र को भेजना चाहिए. 6 घंटे चली मीटिंग में पीएम मोदी ने इस बात के संकेत दिए कि वर्तमान स्थिति में पूरी तरह लॉकडाउन खोलना संभव नहीं है.
Lockdown: पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और तेलंगाना लॉकडाउन बढ़ाने की सिफारिश की. जबकि छत्तीसगढ़, कर्नाटक, आंध्र, बिहार और तमिलनाडु सहित राज्यों में को अनुमति देने के लिए कहा. इन राज्यों ने रेल और हवाई सेवा पर निर्णय लेने से पहले उनसे सलाह लेने की बात कही. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि रेल सेवाओं को शुरू करना एक गलती थी और इसपर उनकी राय ली जानी चाहिए थी. एक रिपोर्ट के अनुसार बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मांग की कि जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन घोषित करने का अधिकार राज्यों को मिलना चहिये. पंजाब के सीएम की मांग पर कई राज्यों ने सहमति दिखाई में इसमें बीजेपी शासित हरियाणा भी शामिल था.
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से कहा कि राज्यों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू लॉकडाउन का अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ पालन किया, लेकिन अब अगले चरण में जोन और प्रतिबंधों पर फैसला करने का अधिकार उन्हें मिलना चाहिए. इस दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा ''जब भारत सरकार ने सीमाओं को खोलना, ट्रेनों को शुरू करने और हवाई अड्डों को खोलने सहित लगभग सब कुछ खोल दिया है, तो ऐसे में लॉकडाउन को जारी रखने का क्या तर्क है''. ममता ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण समय में केंद्र को राजनीति नहीं करनी चाहिए.
महाराष्ट्र के सीएम ने कहा ''मई में मामले चरम पर होने की उम्मीद है, ये जून या जुलाई में भी चरम पर पहुंच सकते हैं. मैंने पढ़ा है कि वुहान में मामलों की दूसरी लहर देखी जा रही है, यहां तक कि WHO ने इस बारे में चेतावनी दी है. इसलिए, मेरा सुझाव है कि लॉकडाउन पर कोई भी कार्रवाई सावधानी से की जानी चाहिए, मेरा अनुरोध है कि अगर जरूरत पड़ी तो राज्य को केंद्रीय बल तैनात किया जाए क्योंकि पुलिस भारी दबाव में है और जवान भी संक्रमित हो रहे हैं''.
बैठक के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा ''आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा हुई. इस दौरान मैंने निम्न मांगे रखीं हैं तथा कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. राज्य के अंदर आर्थिक गतिविधियों के संचालन के निर्णय का अधिकार राज्य सरकार को मिलना चाहिए. कोरोना संक्रमण को लेकर रेड जोन, ग्रीन जोन और ऑरेंज जोन के निर्धारण का दायित्व राज्य सरकारों को दिया जाना चाहिए. रेगुलर ट्रेन और हवाई सेवा, अंतर राज्यीय बस परिवहन की शुरुआत राज्य सरकारों से विचार विमर्श कर किया जाना चाहिए और मनरेगा में 200 दिन की मजदूरी दी जाए.''
तमिलनाडु के CM के. पलानीस्वामी ने कहा ''जैसा कि चेन्नई में पॉजिटिव मामले बढ़ रहे हैं, तमिलनाडु में 31 मई तक ट्रेन सेवा की अनुमति न दी जाए. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि 31 मई तक नियमित हवाई सेवा शुरू न करें''.

Wednesday, 6 May 2020

Lockdown: 40 दिन में रिटेल सेक्टर को 5.5 लाख करोड़ रुपये की क्षति, राहत पैकेज की दरकारः CAIT


खुदरा कारोबारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने मंगलवार को कहा कि लॉकडाउन की वजह से 25 मार्च से 30 अप्रैल के बीच देश के रिटेल सेक्टर को 5.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन ने कहा है कि आने वाले समय में 20 फीसद खुदरा व्यापारियों को लॉकडाउन की वजह से अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। कैट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कारोबारियों के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज लाने की अपील की है। संगठन ने मुश्किल के इस वक्त में कारोबारियों को मदद उपलब्ध कराने के लिए राहत पैकेज की यह मांग की है । कैट करीब 40,000 कारोबारी संगठनों का शीर्ष कन्फेडरेशन है और देश के सात करोड़ कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करता है।  
CAIT ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कोरोना वायरस से भारत के रिटेल सेक्टर को अपूरणीय क्षति हुई है और देशभर में इसके प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेंगे।  
संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, ''लॉकडाउन की वजह से 7 करोड़ व्यापारियों में से लगभग 1.5 करोड़ को अगले कुछ महीनों में ही अपने कारोबार को स्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। इन 1.5 करोड़ कारोबारियों पर निर्भर 75 लाख व्यापारियों को भी अपना व्यापार बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।'' 
विज्ञप्ति में कहा गया है, ''देश में कम-से-कम 2.5 करोड़ व्यापारी बेहद सूक्ष्म और छोटे हैं, जिनके पास इस गंभीर आर्थिक परेशानी से बचने का कोई रास्ता नहीं है। उनके पास ऐसे परिदृश्य में अपने व्यापार के संचालन हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं है। एक तरफ उन्हें वेतन, किराया, अन्य मासिक खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है और दूसरी ओर उन्हें सख्त सोशल डिस्टेंसिंग मानदंडों के साथ व्यवहार करना होगा जो व्यापार को सामान्य स्थिति में नहीं आने देंगे और ऐसा कम से कम आगामी 6-9 महीने तक चलेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रही थी और पूरे क्षेत्र में मांग में भारी गिरावट आई थी, लेकिन इस घातक बीमारी ने भारत के रिटेल व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।''